“नए लेबर कोड के लागू होने से विप्रो को ग्रेच्युटी खर्चों में 302.8 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रावधान बनानी पड़ी, जिससे Q3 में नेट प्रॉफिट 7% YoY घटकर 3,119 करोड़ रुपये रह गया, जबकि रेवेन्यू में मामूली वृद्धि दर्ज हुई।”
विप्रो ने दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) में नए लेबर कोड के कारण ग्रेच्युटी से जुड़े खर्चों पर 302.8 करोड़ रुपये की एकमुश्त प्रावधान की, जो कंपनी के मुनाफे पर भारी पड़ी। इस प्रावधान के बिना, नेट प्रॉफिट में QoQ 3.6% की वृद्धि होती, लेकिन वास्तविक आंकड़े बताते हैं कि मुनाफा 4% QoQ और 7% YoY गिरकर 3,119 करोड़ रुपये पर आ गया। कंपनी के CFO ने कहा कि यह प्रभाव उद्योग में सबसे कम है, क्योंकि विप्रो पहले से ही लेबर कोड के अनुरूप बदलाव कर रहा था, इसलिए आगे कोई निरंतर असर नहीं पड़ेगा।
नए लेबर कोड, जो वेज कोड समेत चार कानूनों को एकीकृत करते हैं, ने कंपनियों पर ग्रेच्युटी कैलकुलेशन में बदलाव लाया, जहां बेसिक सैलरी के 50% तक को शामिल करना अनिवार्य हो गया। विप्रो जैसी आईटी फर्मों के लिए यह कर्मचारी लाभ योजनाओं में अतिरिक्त लागत बढ़ाता है, खासकर बड़ी वर्कफोर्स वाली कंपनियों में। इसके अलावा, कंपनी ने यूरोप ऑपरेशंस और Capco से जुड़े रिस्ट्रक्चरिंग पर 263 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाया, जो कुल एकमुश्त बोझ को 565 करोड़ रुपये तक ले गया।
वित्तीय हाइलाइट्स (कंसोलिडेटेड, रुपये में):
| पैरामीटर | Q3 FY26 | Q2 FY26 | YoY बदलाव (%) |
|---|---|---|---|
| नेट प्रॉफिट | 3,119 करोड़ | 3,252 करोड़ | -7 |
| रेवेन्यू | 23,456 करोड़ | 22,234 करोड़ | +5.5 |
| ऑपरेटिंग मार्जिन | 16.2% | 16.5% | -0.3 |
| टोटल बुकिंग्स | $3,335 मिलियन | $3,542 मिलियन | -5.7 |
कंपनी के IT सर्विसेज सेगमेंट में रेवेन्यू वृद्धि दर्ज हुई, लेकिन बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज में सुस्ती ने ओवरऑल ग्रोथ को सीमित रखा। विप्रो ने अमेरिका और यूरोप मार्केट्स में क्लाइंट्स से नए डील्स हासिल किए, लेकिन लेबर कोड से जुड़ी लागत ने मार्जिन को दबाया। अजीम प्रेमजी की अगुवाई वाली यह कंपनी अब AI और क्लाउड ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस बढ़ा रही है, ताकि भविष्य में ऐसे प्रभावों से बचा जा सके।
प्रमुख प्रभाव और रणनीतियां:
कर्मचारी लागत में वृद्धि: नए कोड से ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और वर्किंग आवर्स में बदलाव से आईटी सेक्टर की कंपनियां प्रभावित, विप्रो ने इसे एकमुश्त समायोजित किया।
उद्योग तुलना: अन्य आईटी दिग्गजों की तुलना में विप्रो का प्रभाव कम, लेकिन TCS और Infosys भी समान प्रावधान बना रही हैं।
भविष्य की तैयारी: कंपनी ने कहा कि आगे कोई अतिरिक्त प्रावधान की जरूरत नहीं, फोकस टैलेंट रिटेंशन और कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन पर।
मार्केट रिएक्शन: ADR में 7% की गिरावट, लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशक AI ग्रोथ पर आशावादी।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों पर आधारित है और केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है।