“रिटायर्ड मेजर सिद्धार्थ राठौड़ भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेस से जुड़े एक अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्होंने 10 वर्षों से अधिक की सेवा के बाद अदाणी ग्रुप में डिप्टी जनरल मैनेजर सिक्योरिटी की भूमिका संभाली है। वे गौतम अदाणी की सुरक्षा व्यवस्था का नेतृत्व करते हैं, जहां सैन्य अनुशासन को कॉर्पोरेट सिक्योरिटी से जोड़ते हैं। उनका करियर राजस्थान की छोटी सी जगह से शुरू होकर हाई-रिस्क ऑपरेशंस तक फैला है, और अब वे थ्रेट एनालिसिस पर फोकस करते हैं।”
रिटायर्ड मेजर सिद्धार्थ राठौड़ भारतीय सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में से एक हैं, जिन्होंने पैराशूट रेजिमेंट स्पेशल फोर्सेस में अपनी सेवाएं दीं। राजस्थान के एक छोटे शहर से ताल्लुक रखने वाले राठौड़ ने सेना में प्रवेश करने से पहले सामान्य जीवन जिया, लेकिन उनके चाचा ब्रिगेडियर सौरभ सिंह शेखावत की प्रेरणा ने उन्हें सैन्य जीवन की ओर मोड़ा। उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी की और सीधे पैरा एसएफ के 12वीं बटालियन में कमीशंड होने वाले पहले अधिकारी बने, जो एक अनोखा रिकॉर्ड है।
सैन्य करियर की मुख्य विशेषताएं
राठौड़ का सैन्य सफर 10 वर्षों से अधिक का रहा, जिसमें उन्होंने आधुनिक युद्ध तकनीकों, क्लोज क्वार्टर कॉम्बैट और हाई-रिस्क ऑपरेशंस में महारत हासिल की। स्पेशल फोर्सेस की ट्रेनिंग में सालाना 3,000 घंटों से ज्यादा समय लगता है, जिसमें फिजिकल फिटनेस, मेंटल रेजिलिएंस, अनिश्चितता में ऑपरेट करने की क्षमता, नींद की कमी और कठिन पर्यावरण शामिल होते हैं। सेलेक्शन प्रोसेस में सिर्फ 10 प्रतिशत से कम उम्मीदवार पास होते हैं, जहां एंड्योरेंस, क्विक थिंकिंग और रिसोर्सफुलनेस की परीक्षा होती है।
राठौड़ ने चुनौतीपूर्ण कॉम्बैट जोन्स में सेवा दी, जहां उन्होंने प्रेशर में शांत रहकर फैसले लिए और राष्ट्रीय हितों की रक्षा की। पैराशूट जंप्स और स्काईडाइविंग जैसे टास्क्स को वे अपनी लिमिट्स, अनुशासन और डिटर्मिनेशन की जांच मानते हैं। मिलिट्री साइकोलॉजी स्टडीज के अनुसार, स्पेशल फोर्सेस के सदस्य स्ट्रेस मैनेजमेंट में बेहतर होते हैं, जो राठौड़ के करियर में साफ दिखता है। उन्होंने सेना में रहते हुए थ्रेट एनालिसिस, रिस्क असेसमेंट और टीम लीडरशिप जैसे स्किल्स विकसित किए, जो अब कॉर्पोरेट वर्ल्ड में काम आ रहे हैं।
कॉर्पोरेट सिक्योरिटी में संक्रमण
| सैन्य करियर हाइलाइट्स | विवरण |
|---|---|
| कमीशनिंग | पैरा एसएफ की 12वीं बटालियन में पहला डायरेक्ट कमीशंड अधिकारी |
| सेवा अवधि | 10 वर्ष से अधिक, हाई-रिस्क ऑपरेशंस में शामिल |
| ट्रेनिंग फोकस | 3,000+ घंटे सालाना, फिजिकल/मेंटल फिटनेस, harsh environments |
| सेलेक्शन रेट | <10% पास रेट, एंड्योरेंस और क्विक डिसीजन मेकिंग पर जोर |
| मुख्य स्किल्स | क्लोज कॉम्बैट, थ्रेट एनालिसिस, टीम मैनेजमेंट |
सेना से रिटायरमेंट के बाद राठौड़ ने कॉर्पोरेट सेक्टर में कदम रखा, जहां उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंदौर से मैनेजमेंट एजुकेशन प्राप्त की। यह संक्रमण प्लान्ड था, क्योंकि वे सैन्य स्किल्स को सिविलियन सेक्टर में अप्लाई करना चाहते थे। अदाणी ग्रुप में डिप्टी जनरल मैनेजर सिक्योरिटी के रूप में जॉइन करने से पहले, उन्होंने मिलिट्री पेंशन और कंसल्टिंग वर्क से अपनी फाइनेंशियल सिक्योरिटी सुनिश्चित की। इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स के अनुसार, ऐसे सीनियर कॉर्पोरेट सिक्योरिटी लीडर्स की नेट वर्थ 3 से 5 करोड़ रुपये के बीच अनुमानित है, जिसमें पेंशन और अन्य इनकम सोर्स शामिल हैं।
अदाणी ग्रुप में राठौड़ अहमदाबाद, गुजरात बेस्ड हैं, जहां वे हाई-वैल्यू एसेट्स की सिक्योरिटी प्लानिंग का नेतृत्व करते हैं। इनमें चेयरमैन गौतम अदाणी की पर्सनल सिक्योरिटी भी शामिल है, जिसे वे राष्ट्रीय हितों की रक्षा से तुलनीय मानते हैं। ग्रुप की सिक्योरिटी टीम में ज्यादातर एक्स-मिलिट्री मेंबर्स हैं, जो विजिलेंस और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखते हैं। राठौड़ मिलिट्री प्लानिंग, रेगुलेशंस और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को जोड़कर बिजनेस कंटिन्यूटी सुनिश्चित करते हैं। भारतीय कॉर्पोरेट्स में 30 प्रतिशत से ज्यादा बड़ी कंपनियां एक्स-डिफेंस ऑफिसर्स को सीनियर सिक्योरिटी पोजिशंस पर रखती हैं, जो इस ट्रेंड को दर्शाता है।
वर्तमान भूमिका और जिम्मेदारियां
अदाणी ग्रुप में राठौड़ की मुख्य जिम्मेदारी थ्रेट एनालिसिस और स्ट्रैटेजिक प्रोटेक्शन है। वे कॉर्पोरेट सिक्योरिटी को बिजनेस गोल्स से अलाइन करते हैं, जिसमें रिस्क मैनेजमेंट, टीम ट्रेनिंग और इमरजेंसी रिस्पॉन्स शामिल हैं। गौतम अदाणी की सिक्योरिटी को वे एक मिशन मानते हैं, जहां स्पेशल फोर्सेस का मंत्र ‘इनविजिबल रहो, हमेशा तैयार रहो और जरूरत पर स्ट्राइक करो’ लागू होता है। राठौड़ की लीडरशिप स्टाइल कैल्म और मिशन-ओरिएंटेड है, जो हाई-स्टेक्स सिचुएशंस में प्रभावी साबित होती है।
थ्रेट असेसमेंट : संभावित रिस्क्स की पहचान और मिटिगेशन स्ट्रैटेजीज विकसित करना।
टीम मैनेजमेंट : एक्स-मिलिट्री सदस्यों की टीम को ट्रेन करना, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाती है।
बिजनेस इंटीग्रेशन : सिक्योरिटी को कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जोड़ना, ताकि बिजनेस कंटिन्यूटी प्रभावित न हो।
पर्सनल प्रोटेक्शन : चेयरमैन अदाणी की सेफ्टी सुनिश्चित करना, जिसमें एडवांस प्लानिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग शामिल है।
इंडस्ट्री ट्रेंड : भारतीय कॉर्पोरेट्स में मिलिट्री बैकग्राउंड वाले लीडर्स की डिमांड बढ़ रही है, खासकर साइबर और फिजिकल थ्रेट्स के दौर में।
राठौड़ का सफर साबित करता है कि मिलिट्री डिसिप्लिन इंडस्ट्री-एग्नोस्टिक है, जो कॉम्बैट जोन्स से कॉर्पोरेट कॉरिडोर्स तक लागू होती है। उनके अनुभव से पता चलता है कि लीडरशिप, सैक्रिफाइस और टैक्टिकल नॉलेज किसी भी फील्ड में कामयाबी दिला सकते हैं। अदाणी ग्रुप जैसे बड़े संगठनों में उनकी भूमिका सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स को नई ऊंचाई दे रही है, जहां रिस्क्स की पहचान पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि और प्रभाव
राठौड़ को एक शांत और मापा हुआ व्यक्ति माना जाता है, जो हमेशा मिशन पर फोकस्ड रहते हैं। उनके चाचा की प्रेरणा ने न सिर्फ करियर चुना, बल्कि मूल्यों को भी आकार दिया। स्पेशल फोर्सेस में सीखी गई रेजिलिएंस अब कॉर्पोरेट में मदद कर रही है, जहां वे अनिश्चितताओं में भी प्रभावी फैसले लेते हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे ट्रांजिशंस से कॉर्पोरेट सिक्योरिटी मजबूत होती है, क्योंकि मिलिट्री ट्रेनिंग रियल-वर्ल्ड थ्रेट्स से निपटने में सक्षम बनाती है। राठौड़ का उदाहरण युवा अधिकारियों के लिए प्रेरणा है, जो रिटायरमेंट के बाद सिविलियन रोल्स में योगदान दे सकते हैं।
| कॉर्पोरेट भूमिका हाइलाइट्स | विवरण |
|---|---|
| पोजिशन | डिप्टी जनरल मैनेजर सिक्योरिटी, अदाणी ग्रुप |
| लोकेशन | अहमदाबाद, गुजरात |
| मुख्य दायित्व | हाई-वैल्यू एसेट्स की प्रोटेक्शन,包括 चेयरमैन अदाणी |
| टीम कंपोजिशन | ज्यादातर एक्स-मिलिट्री सदस्य |
| अनुमानित नेट वर्थ | 3-5 करोड़ रुपये (पेंशन, कंसल्टिंग आधारित) |
राठौड़ की कहानी से पता चलता है कि सेवा का मतलब सिर्फ यूनिफॉर्म नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और नेतृत्व है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में जारी रह सकता है। उनके जैसे जांबाज अधिकारी कॉर्पोरेट वर्ल्ड में मिलिट्री वैल्यूज को इंटीग्रेट कर रहे हैं, जिससे सिक्योरिटी फ्रेमवर्क मजबूत हो रहा है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचारों, रिपोर्ट्स और टिप्स पर आधारित है।