“देशभर में 12 फरवरी 2026 को बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज ठप हो सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक सहित कई प्रमुख बैंकों की शाखाएं प्रभावित होंगी, जबकि डिजिटल सेवाएं सामान्य रहेंगी। यूनियनों की मुख्य मांगें नए लेबर कोड्स का विरोध, 5-डे वर्क वीक लागू करना और श्रमिक अधिकारों की रक्षा हैं। ग्राहकों को सलाह है कि जरूरी लेन-देन आज ही निपटा लें।”
बैंक हड़ताल: 12 फरवरी को क्या होगा असर और क्यों हो रही है हड़ताल
देश के प्रमुख बैंक यूनियनों ने 12 फरवरी 2026 (गुरुवार) को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है, जिससे करोड़ों ग्राहकों की बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) जैसी प्रमुख यूनियनों ने अपने सदस्यों को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) के साथ इस हड़ताल में शामिल होने की अपील की है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने खुद ग्राहकों को अलर्ट जारी कर कहा है कि सेवाएं सीमित रूप से प्रभावित हो सकती हैं, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा और आईडीबीआई बैंक ने भी संभावित व्यवधान की सूचना दी है।
हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस दिन कोई आधिकारिक छुट्टी घोषित नहीं की है और बैंक शाखाएं तकनीकी रूप से खुली रहेंगी, लेकिन कर्मचारियों की भारी भागीदारी से काउंटर सेवाएं, चेक क्लीयरेंस, नकद लेन-देन और अन्य ब्रांच-आधारित कार्य प्रभावित होंगे। ग्राहकों को लंबी कतारें, देरी या कुछ सेवाओं का पूरी तरह ठप होना पड़ सकता है।
हड़ताल से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले बैंक
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक, जहां करोड़ों खाते हैं। SBI ने BSE को सूचित किया कि हड़ताल से काम सीमित प्रभावित हो सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB): प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक, जहां ब्रांच ऑपरेशंस प्रभावित होने की आशंका।
आईडीबीआई बैंक: यूनियनों से फॉर्मल स्ट्राइक नोटिस प्राप्त, सेवाओं पर असर संभावित।
अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जैसे पंजाब नेशनल बैंक (PNB), कैनरा बैंक आदि में भी समान प्रभाव की उम्मीद।
निजी क्षेत्र के बैंक जैसे HDFC Bank, ICICI Bank में यूनियन प्रभाव कम होने से व्यवधान न्यूनतम रह सकता है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
बैंक कर्मचारी लंबे समय से कई मुद्दों पर आंदोलनरत हैं। इस हड़ताल का मुख्य कारण केंद्र सरकार द्वारा नवंबर में अधिसूचित चार नए लेबर कोड्स हैं, जो 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह ले रहे हैं। यूनियनों का आरोप है कि ये कोड श्रमिक विरोधी हैं और ट्रेड यूनियनों के पंजीकरण में सख्त शर्तें लगाते हैं।
अन्य प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
5-डे वर्क वीक का तत्काल लागू होना : बैंक कर्मचारी 6 दिन काम करते हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में 5-डे वर्क वीक लागू है। इससे वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ रहा है, खासकर महिला कर्मचारियों (जो कुल वर्कफोर्स का लगभग 30% हैं) के लिए।
नए लेबर कोड्स का वापस लेना : यूनियनों का कहना है कि ये कोड कार्यकर्ताओं पर हमला हैं और हड़ताल के अधिकार को सीमित करते हैं।
कर्मचारी कल्याण और पेंशन सुरक्षा : बढ़ते कार्यभार, स्टाफ की कमी और तनाव के कारण कई कर्मचारियों की मौत के मामले सामने आए हैं। बेहतर कार्य परिस्थितियां और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग।
निजीकरण और आउटसोर्सिंग का विरोध : सार्वजनिक बैंकों में निजीकरण की आशंका से नौकरियां खतरे में।
ग्राहकों के लिए सलाह और वैकल्पिक व्यवस्था
जरूरी चेक जमा, नकद निकासी या ब्रांच विजिट से जुड़े काम आज (11 फरवरी) ही पूरा करें।
UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, ATM और AePS जैसी डिजिटल सेवाएं पूरी तरह काम करेंगी, क्योंकि ये कर्मचारियों पर निर्भर नहीं हैं।
बड़े लेन-देन या लोन/फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े काम टालें या डिजिटल माध्यम अपनाएं।
यदि संभव हो तो प्राइवेट बैंक या छोटे सहकारी बैंकों का उपयोग करें जहां प्रभाव कम हो सकता है।
यह हड़ताल बैंकिंग सेक्टर में लंबे समय से चली आ रही असंतोष की अभिव्यक्ति है, जहां कर्मचारी डिजिटल इंडिया के साथ बढ़ते कार्यभार का सामना कर रहे हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यूनियनों का कहना है कि यह संघर्ष ग्राहक विरोधी नहीं बल्कि बेहतर और टिकाऊ बैंकिंग सिस्टम के लिए है।
Disclaimer: यह एक समाचार रिपोर्ट है। इसमें व्यक्त की गई जानकारी उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है और इसमें कोई निवेश सलाह नहीं है।