वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार 4.6 ट्रिलियन डॉलर का है, जहां चीन, हॉन्गकॉन्ग और ताईवान उच्च-प्रौद्योगिकी कलपुर्जों जैसे सेमीकंडक्टर और इंटीग्रेटेड सर्किट पर कब्जा जमाए हुए हैं। भारत की हिस्सेदारी मात्र 1% के आसपास है, लेकिन 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात रिकॉर्ड 47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार FTA का बेहतर उपयोग, रणनीतिक कंपोनेंट उत्पादन और लागत कम करके भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखला में मजबूत जगह बना सकता है। मोबाइल फोन निर्यात में 52.5% हिस्सा है, जबकि PLI योजना से उत्पादन में तेज वृद्धि हुई है।
चीन, हॉन्गकॉन्ग-ताईवान का दबदबा, लेकिन भारत की 1% हिस्सेदारी; FTA बढ़ाएगा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात, क्या है प्लान?
वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार में पूर्वी एशिया का प्रभुत्व बरकरार है। चीन, हॉन्गकॉन्ग और ताईवान उच्च-प्रौद्योगिकी कंपोनेंट्स जैसे इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) और सेमीकंडक्टर के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं। 2024 के आंकड़ों के अनुसार वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार का आकार 4.6 ट्रिलियन डॉलर है, लेकिन भारत की हिस्सेदारी महज 1% के करीब रही।
इसके विपरीत भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेजी आई है। 2025 में कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 47 बिलियन डॉलर (लगभग 4.15 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया, जिसमें PLI योजना से प्रेरित स्मार्टफोन निर्यात का योगदान करीब 30 बिलियन डॉलर रहा। पिछले दशक में निर्यात आठ गुना बढ़ा है, जबकि 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक गुड्स भारत के तीसरे सबसे बड़े निर्यात श्रेणी में शामिल हुए।
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात मुख्य रूप से USA, UAE और नीदरलैंड्स की ओर जाते हैं। मोबाइल फोन इस बास्केट का 52.5% हिस्सा रखते हैं, जबकि पावर इक्विपमेंट और वायर्स छोटे योगदान देते हैं। वहीं आयात में इंटीग्रेटेड सर्किट (23.7%), मोबाइल फोन (17.5%) और डेटा प्रोसेसिंग मशीनें (10.6%) प्रमुख हैं।
नीति आयोग की ट्रेड वॉच क्वार्टरली रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत को संरचनात्मक लागत नुकसान दूर करने होंगे। FTA का रणनीतिक उपयोग करके बाजार पहुंच बढ़ानी होगी और रणनीतिक कंपोनेंट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाना होगा। हाल के वर्षों में भारत ने कई FTA किए या अंतिम रूप दिए हैं, जैसे UK (2025 में साइन), Oman (2025), EFTA (2025 में लागू), New Zealand (2025 में बातचीत पूरी), और EU (जनवरी 2026 में अंतिम रूप)। ये समझौते टैरिफ कम करके भारतीय उत्पादों को यूरोपीय और अन्य बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
PLI योजना इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सबसे सफल साबित हुई है। FY 2021 से FY 2025 तक मोबाइल फोन उत्पादन 146% बढ़कर 5.45 लाख करोड़ रुपये पहुंचा। बड़े स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI से 13,475 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश आया, जिससे कुल उत्पादन 9.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। कुल इलेक्ट्रॉनिक गुड्स उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।
सरकार का प्लान वैश्विक मूल्य श्रृंखला में गहराई से जुड़ना है। इसमें शामिल हैं:
ट्रेड फैसिलिटेशन बढ़ाना और सरकारी खरीद में पूर्वानुमानित नीतियां अपनाना
एंकर निवेश आकर्षित करना और MSME को वैश्विक चेन में शामिल करना
घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाना, असेंबली से आगे कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
एक्सपोर्ट फाइनेंस और रेगुलेटरी सरलीकरण से निवेश आकर्षित करना
वर्तमान में भारत स्मार्टफोन में मजबूत हो रहा है, जहां Apple जैसी कंपनियां भारत से निर्यात बढ़ा रही हैं। 2025 में भारत अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में चीन को पीछे छोड़ चुका है। भविष्य में टैबलेट, लैपटॉप और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में विस्तार का लक्ष्य है।
FTA से निर्यात बढ़ने की संभावना मजबूत है। EU FTA से 2031 तक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो आगे 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो सकता है। इससे रोजगार सृजन, इनोवेशन और भारत को विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।