“भारतीय ग्राहक इस कार की तरफ मुंह नहीं मोड़ रहे, लेकिन विदेशी बाजारों में इसकी जबरदस्त मांग ने निर्यात आंकड़ों को नई ऊंचाई दी है। कुल निर्यात अब 1.50 लाख यूनिट्स के पार पहुंच चुका है, जबकि घरेलू बिक्री अपेक्षा से कम बनी हुई है। यह मेड इन इंडिया कार वैश्विक स्तर पर भारतीय ऑटो सेक्टर की ताकत साबित हो रही है।”
घरेलू बाजार में अनदेखी, विदेश में धमाल
भारतीय बाजार में एसयूवी और कॉम्पैक्ट कारों की होड़ में कुछ मॉडल्स ग्राहकों की पहली पसंद नहीं बन पा रहे, लेकिन निर्यात में ये वही कारें स्टार साबित हो रही हैं। खास तौर पर एक ऐसी कार है जिसे भारतीय ग्राहक नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन विदेशी बाजारों में इसकी डिमांड इतनी तेज है कि कंपनी के निर्यात आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
यह कार महिंद्रा स्कॉर्पियो पिक-अप (Scorpio Pik Up) है, जो मुख्य रूप से लाइट कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में आती है। भारत में पैसेंजर व्हीकल के रूप में इसकी डिमांड सीमित है, क्योंकि ग्राहक अब फुल-फ्लेज्ड एसयूवी जैसे स्कॉर्पियो एन या थार की तरफ ज्यादा झुक रहे हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, खासकर इंडोनेशिया जैसे देशों में, इसकी उपयोगिता और मजबूती के कारण जबरदस्त मांग है।
2026 में महिंद्रा ने इंडोनेशिया की राज्य-स्वामित्व वाली कंपनी एग्रीनास पangan नुसंतारा के साथ अपना अब तक का सबसे बड़ा निर्यात ऑर्डर हासिल किया है। इस डील के तहत 35,000 यूनिट्स सिंगल-कैब स्कॉर्पियो पिक-अप 2026 भर में सप्लाई की जाएंगी। यह ऑर्डर अकेले कंपनी के पिछले वित्त वर्ष (FY25) के कुल निर्यात से ज्यादा है। ये वाहन इंडोनेशिया में ग्रामीण सहकारी समितियों के लिए फूड लॉजिस्टिक्स और कृषि कार्यों में इस्तेमाल होंगे।
इस डील से महिंद्रा के इंटरनेशनल ऑपरेशंस को बड़ी मजबूती मिली है। कंपनी के CEO ऑटोमोटिव डिवीजन नलिनिकांत गोल्लागुंटा ने इसे कंपनी के लिए माइलस्टोन बताया है। स्कॉर्पियो पिक-अप दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और मोजाम्बिक जैसे बाजारों में पहले से ही लोकप्रिय है, जहां महिंद्रा ने स्कॉर्पियो-एन और XUV700 जैसी मॉडल्स भी लॉन्च की हैं।
निर्यात में उछाल, घरेलू बाजार में चुनौतियां
भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में 2026 की शुरुआत निर्यात के लिहाज से शानदार रही है। जनवरी 2026 में पैसेंजर कार निर्यात 43.6% बढ़कर 37,329 यूनिट्स पर पहुंच गया, जबकि घरेलू बिक्री में 5.1% की गिरावट आई। मारुति सुजुकी ने निर्यात में 23,149 यूनिट्स के साथ टॉप पर जगह बनाई, लेकिन अन्य कंपनियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
महिंद्रा की स्कॉर्पियो सीरीज कुल मिलाकर निर्यात में अहम भूमिका निभा रही है। कंपनी ने 2026 में इंडोनेशिया के अलावा अन्य बाजारों में भी अपनी पकड़ मजबूत की है। वहीं टाटा मोटर्स की नेक्सन और पंच जैसी कारें घरेलू बाजार में टॉप सेलर हैं (फरवरी 2026 में नेक्सन 19,430 यूनिट्स और पंच 18,748 यूनिट्स बिकीं), लेकिन कुछ मॉडल्स निर्यात पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
क्यों ठेंगा दिखा रहे भारतीय ग्राहक?
| कंपनी/मॉडल | घरेलू बाजार स्थिति | निर्यात हाइलाइट्स | कुल प्रभाव |
|---|---|---|---|
| महिंद्रा स्कॉर्पियो पिक-अप | भारत में कम डिमांड (पैसेंजर सेगमेंट में अनदेखी) | 35,000 यूनिट्स का रिकॉर्ड ऑर्डर (इंडोनेशिया) | कुल निर्यात 1.50 लाख+ पार |
| टाटा नेक्सन/पंच | भारत में टॉप सेलर (नेक्सन नंबर 1) | EV और पिक-अप निर्यात में तेजी | घरेलू + निर्यात बैलेंस |
| मारुति फ्रॉन्क्स | घरेलू में अच्छी बिक्री | 25 महीनों में 1 लाख+ निर्यात | सबसे तेज निर्यात माइलस्टोन |
भारतीय बाजार में प्राथमिकता अब प्रीमियम एसयूवी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और फीचर-रिच कारों की तरफ शिफ्ट हो गई है। स्कॉर्पियो पिक-अप जैसे यूटिलिटी व्हीकल्स को परिवारों की बजाय कमर्शियल यूज के लिए देखा जाता है, लेकिन कमर्शियल सेगमेंट में भी कॉम्पिटिशन बढ़ गया है। वहीं विदेशों में रोड कंडीशंस, कृषि और लॉजिस्टिक्स की जरूरतों के कारण ये रग्ड व्हीकल्स ज्यादा पसंद किए जाते हैं।
यह ट्रेंड भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए सकारात्मक है, क्योंकि निर्यात से कंपनियों को राजस्व मिल रहा है और मेड इन इंडिया की ब्रांडिंग मजबूत हो रही है। महिंद्रा जैसी कंपनियां अब ग्लोबल हब बनने की राह पर हैं।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध बाजार रुझानों और रिपोर्टेड आंकड़ों पर आधारित है। निवेश या खरीद निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।