“अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया है। अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष छूट दी है, जिससे भारतीय रिफाइनरी कंपनियां समुद्र में फंसे रूसी क्रूड ऑयल के लाखों बैरल खरीद सकेंगी। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर तत्काल दबाव कम होगा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनेगी।”
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच समुद्र में फंसा रूसी तेल खरीदेंगी भारतीय कंपनियां, पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर भारत को बड़ी राहत!
अमेरिका-ईरान युद्ध के तेज होने से मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद होने से गल्फ देशों से भारत की करीब 40 प्रतिशत तेल आयात प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को भारत के लिए 30 दिनों की विशेष लाइसेंस जारी की है, जो 5 मार्च से पहले लोड किए गए रूसी क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री, डिलीवरी और ऑफलोडिंग की अनुमति देती है। यह छूट 4 अप्रैल तक वैध रहेगी।
भारतीय रिफाइनरी कंपनियां अब तट के पास तैरते रूसी टैंकरों से तुरंत क्रूड खरीद रही हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने पहले ही फ्लोटिंग रूसी ऑयल की खरीद तेज कर दी है, जबकि अन्य रिफाइनरी भी इसी दिशा में कदम उठा रही हैं। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत के पास पहुंचने वाले रूसी क्रूड के 15 मिलियन बैरल से अधिक पहले से ही उपलब्ध हैं, जिसमें से कई टैंकर पूर्वी और पश्चिमी तट पर पहुंच चुके या पहुंचने वाले हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 20 मिलियन बैरल रूसी क्रूड की प्रॉम्प्ट खरीद पहले ही हो चुकी है।
युद्ध से पहले भारत ने अमेरिकी दबाव में रूसी तेल आयात कम कर दिया था। जनवरी 2026 में रूसी क्रूड की हिस्सेदारी घटकर 19.3 प्रतिशत रह गई थी, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम स्तर था। फरवरी में यह बढ़कर 30 प्रतिशत के आसपास पहुंची। लेकिन अब होर्मुज संकट के कारण मध्य पूर्व से सप्लाई घटी तो रूसी ऑयल की ओर रुख तेज हुआ है। रूस भारत को 40 प्रतिशत तक क्रूड सप्लाई करने को तैयार है।
रूसी क्रूड Urals ग्रेड अभी भी ब्रेंट से डिस्काउंट पर उपलब्ध है, हालांकि युद्ध के कारण डिस्काउंट पहले जितना चौड़ा नहीं रहा। फिर भी, यह भारत के लिए सस्ता विकल्प बना हुआ है। अमेरिकी छूट से भारतीय रिफाइनरी को तत्काल राहत मिलेगी, क्योंकि मध्य पूर्व से आयात में 10-15 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल की घरेलू उपलब्धता बनी रहेगी और कीमतों में अचानक उछाल से बचा जा सकेगा।
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अमेरिकी छूट की अवधि | 30 दिन (5 मार्च से लोडेड कार्गो के लिए, 4 अप्रैल तक वैध) |
| उपलब्ध रूसी क्रूड मात्रा | 15-20 मिलियन बैरल से अधिक फ्लोटिंग/नजदीक |
| भारतीय रिफाइनरी की कार्रवाई | IOC सहित अन्य कंपनियां प्रॉम्प्ट खरीद में जुटीं |
| रूस की पेशकश | भारत की जरूरत का 40% तक क्रूड सप्लाई |
| होर्मुज प्रभाव | भारत के 40% तेल आयात पर असर, सप्लाई चेन बाधित |
| पिछले स्तर | जनवरी 2026 में रूसी हिस्सा 19.3%, फरवरी में ~30% |
यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। रूसी टैंकर अब पूर्व एशिया की बजाय भारत की ओर रूट बदल रहे हैं। एक Aframax टैंकर 7 लाख बैरल Urals क्रूड लेकर वडिनार पहुंच चुका है, जबकि दूसरा इसी सप्ताह पहुंचने वाला है। रूस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तैयार है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। इस संकट में अमेरिकी छूट से न केवल सप्लाई चेन स्थिर रहेगी, बल्कि रिफाइनरी की क्षमता उपयोग भी बेहतर होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी राहत लंबे समय तक मध्य पूर्व संकट बने रहने पर रूसी आयात को स्थायी रूप से बढ़ावा दे सकती है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी, उद्योग स्रोतों और वर्तमान घटनाक्रम पर आधारित है। बाजार स्थितियां बदल सकती हैं। निवेश या निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।