देश की नंबर-1 कंपनी टाटा मोटर्स का बड़ा एलान, इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें जल्द पेट्रोल-डीजल के बराबर!

देश की सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल कंपनी टाटा मोटर्स ने घोषणा की है कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की कीमतें अब पेट्रोल और डीजल कारों के बहुत करीब पहुंच चुकी हैं। एंट्री-लेवल मॉडल्स में अब अंतर महज 10% रह गया है। बैटरी लागत में कमी, लोकलाइजेशन और बेहतर इंटीग्रेशन से यह संभव हुआ है। कंपनी का मानना है कि जल्द ही पूरी तरह से बराबरी हो जाएगी, जिससे भारत में EV अपनाने की रफ्तार बढ़ेगी।

देश की नंबर-1 कंपनी टाटा मोटर्स का बड़ा एलान: इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें पेट्रोल-डीजल के बराबर होने वाली हैं

टाटा मोटर्स के चीफ प्रोडक्ट्स ऑफिसर आनंद कुलकर्णी ने हाल ही में खुलासा किया कि कंपनी के कुछ एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक मॉडल अब इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल-डीजल कारों की कीमतों से महज 10% के अंतर पर आ चुके हैं। यह अंतर पहले 20-40% तक था, लेकिन बैटरी कीमतों में वैश्विक गिरावट (2010 में $1200/kWh से अब $120-150/kWh), भारत में लोकलाइजेशन और बेहतर उत्पादन एकीकरण से यह संभव हुआ है। कुलकर्णी के अनुसार, एंट्री सेगमेंट में यह बराबरी हासिल करने से मास मार्केट में EV अपनाने का बड़ा अवसर खुलेगा।

टाटा मोटर्स भारत की EV मार्केट में लीडर बनी हुई है। कंपनी के पास पंच EV, नेक्सन EV, टियागो EV, टिगोर EV, कर्व EV और हैरियर EV जैसे मॉडल हैं। हाल के अपडेट्स में पंच EV का फेसलिफ्ट मॉडल ₹9.69 लाख से शुरू होता है, जबकि लॉन्ग रेंज वैरिएंट 421 किमी तक की रेंज देता है। कंपनी ने बैटरी को अलग से चार्ज करने का ऑप्शन भी दिया है, जिससे कार की शुरुआती कीमत ₹6.49 लाख (करीब $7,100) तक कम हो जाती है और बैटरी यूज के हिसाब से ₹2.6 प्रति किमी चुकाना पड़ता है। यह मॉडल 350-421 किमी रेंज के साथ लाइफटाइम बैटरी वारंटी देता है।

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वर्तमान में भारत में EV कीमतों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:

टाटा पंच EV: ₹8.09 लाख से ₹12.59 लाख

एमजी विंडसर EV: ₹11.98 लाख से ₹15.95 लाख

मारुति सुजुकी ई-विटारा: ₹13.49 लाख से ₹17.26 लाख

महिंद्रा BE 6: ₹18.90 लाख से ₹28.49 लाख

महिंद्रा XEV 9e: ₹21.90 लाख से ₹31.25 लाख

इसी सेगमेंट की पेट्रोल/डीजल कारें अक्सर ₹6-15 लाख के बीच उपलब्ध हैं। टाटा के अनुसार, एंट्री लेवल पर अब EV की कीमतें ICE से सिर्फ 10% ज्यादा हैं, और कुछ मामलों में बराबरी के करीब पहुंच गई हैं। कंपनी FY30 तक EV बिजनेस में ₹16,000-18,000 करोड़ निवेश करने की योजना बना रही है।

यह बदलाव बैटरी टेक्नोलॉजी की वजह से आया है। बैटरी पैक EV की कुल कीमत का 40% हिस्सा रखते हैं। वैश्विक स्तर पर बैटरी लागत घटी है, और भारत में लोकल प्रोडक्शन बढ़ने से इंपोर्ट ड्यूटी और कॉस्ट कम हुई। टाटा मोटर्स का लक्ष्य है कि 2026-2028 तक एंट्री लेवल EV पूरी तरह ICE कीमतों पर मैच करें, साथ ही 400 किमी रेंज दें।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश चंद्रा ने नए मॉडल्स को गेम-चेंजर बताया है। पंच EV जैसे मॉडल टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनाने को बढ़ावा देंगे, जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। EV की रनिंग कॉस्ट पहले से ही 60-70% कम है। 5 साल में पेट्रोल कार पर ₹4-5 लाख फ्यूल खर्च होता है, जबकि EV पर ₹1-1.5 लाख चार्जिंग कॉस्ट। मेंटेनेंस भी कम होने से कुल ओनरशिप कॉस्ट में बड़ा फायदा है।

टाटा मोटर्स की यह रणनीति भारत को EV हब बनाने में मदद करेगी। कंपनी का EV सेल्स में हिस्सा बढ़ रहा है, और 2030 तक कुल सेल्स का एक तिहाई EV से आने की उम्मीद है। बैटरी कॉस्ट में और कमी, चार्जिंग नेटवर्क विस्तार और सरकारी नीतियां इस बदलाव को तेज करेंगी।

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