मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध से उत्पन्न संकट के बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इतिहास का सबसे बड़ा कदम उठाया है। 32 सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से उछली क्रूड कीमतों को नियंत्रित करने के लिए है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश में ईंधन कीमतें घटने की संभावना बढ़ गई है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने के लिए अभूतपूर्व कदम उठाया है। 11 मार्च 2026 को पेरिस में हुई असाधारण बैठक में 32 सदस्य देशों ने एकमत से आपातकालीन भंडार से कुल 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। यह IEA के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी रिलीज है, जो 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई 182 मिलियन बैरल रिलीज से दोगुनी से अधिक है।
यह फैसला अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 से जारी युद्ध के कारण हुआ है, जिसमें ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया। इस जलडमरूमध्य से विश्व का लगभग 20 प्रतिशत तेल निर्यात होता है, जो मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट से एशिया की ओर जाता है। युद्ध शुरू होने के बाद निर्यात मात्रा 10 प्रतिशत से भी कम रह गई, जिससे ब्रेंट क्रूड कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर हाल के दिनों में 100 डॉलर के पार पहुंच गईं। कुछ समय के लिए यह 110 डॉलर तक भी छू गईं।
IEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फतिह बिरोल ने कहा कि बाजार में चुनौतियां अभूतपूर्व स्तर की हैं, इसलिए सदस्य देशों ने अभूतपूर्व आकार की सामूहिक कार्रवाई की है। सदस्य देशों के पास कुल 1.2 बिलियन बैरल सरकारी आपातकालीन भंडार हैं, साथ ही 600 मिलियन बैरल उद्योग भंडार सरकारी दायित्व के तहत हैं। इस रिलीज में अमेरिका सबसे बड़ा योगदान देगा, जो 172 मिलियन बैरल जारी करेगा। जापान ने 80 मिलियन बैरल रिलीज करने की घोषणा की है। अन्य देश भी अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार समयबद्ध तरीके से तेल उपलब्ध कराएंगे।
भारत पर प्रभाव काफी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि देश अपनी 85 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल आयात करता है। युद्ध शुरू होने के बाद क्रूड कीमतों में तेज उछाल से पेट्रोल-डीजल कीमतें बढ़ने का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन यह रिलीज बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर लगाम लगा सकती है। वर्तमान में भारत में पेट्रोल और डीजल कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर है। मुंबई में पेट्रोल 103.49 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर है। पिछले कुछ दिनों से कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन क्रूड में नरमी आने पर आने वाले दिनों में राहत मिल सकती है।
यह रिलीज बाजार को तत्काल राहत देगी, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अस्थायी उपाय है। 400 मिलियन बैरल रिलीज वैश्विक आपूर्ति के लगभग 20 दिनों के नुकसान को कवर करेगी, लेकिन यदि होर्मुज में संकट लंबा खिंचा तो कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। IEA ने स्पष्ट किया कि रिलीज का समय और मात्रा प्रत्येक देश की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी, जिसमें क्रूड और रिफाइंड उत्पाद दोनों शामिल हो सकते हैं।
प्रमुख बिंदु:
रिलीज का आकार: 400 मिलियन बैरल (इतिहास में सबसे बड़ा)
IEA सदस्य भंडार: 1.2 बिलियन बैरल सरकारी + 600 मिलियन बैरल उद्योग
अमेरिका का योगदान: 172 मिलियन बैरल
जापान का योगदान: 80 मिलियन बैरल
कारण: होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधा (20% वैश्विक तेल प्रभावित)
भारत में वर्तमान कीमतें (12 मार्च 2026): दिल्ली – पेट्रोल ₹94.77/लीटर, डीजल ₹87.67/लीटर; मुंबई – पेट्रोल ₹103.49/लीटर, डीजल ₹90.03/लीटर
संभावित प्रभाव: क्रूड में नरमी से भारत में ईंधन कीमतों पर दबाव कम, लेकिन लंबे संकट में चुनौती बरकरार
यह कदम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत है, खासकर भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए जहां तेल कीमतें महंगाई और आर्थिक स्थिरता को सीधे प्रभावित करती हैं। बाजार अब रिलीज की गति और युद्ध की स्थिति पर नजर रखे हुए है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और वर्तमान घटनाक्रम पर आधारित है। ईंधन कीमतें बाजार स्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं।