“केंद्र सरकार अक्टूबर 2026 से कारों के लिए नई फ्यूल एफिशिएंसी टेस्टिंग नियम लागू करने जा रही है, जिसमें AC ऑन रखकर माइलेज जांचना अनिवार्य होगा। इससे ICE और EV वाहनों के रियल-वर्ल्ड माइलेज क्लेम्स ज्यादा सटीक होंगे, और निर्माताओं को AC ऑन-ऑफ दोनों स्थितियों में आंकड़े बताने होंगे।”
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने कार निर्माताओं के लिए फ्यूल एफिशिएंसी टेस्टिंग में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। नई व्यवस्था के तहत, अक्टूबर 2026 से सभी कारों—चाहे ICE इंजन वाली हों या EV—की माइलेज टेस्टिंग AC ऑन रखकर की जाएगी। अभी तक टेस्टिंग AC ऑफ करके होती है, जिससे लैब के आंकड़े रियल-वर्ल्ड यूज से 10-20% ज्यादा दिखते हैं।
यह नियम WLTP (Worldwide Harmonized Light Vehicles Test Procedure) पर आधारित होगा, जो यूरोपीय देशों में पहले से लागू है। भारत में यह बदलाव उपभोक्ताओं को ज्यादा पारदर्शी जानकारी देगा, क्योंकि गर्म मौसम में AC का इस्तेमाल माइलेज को काफी प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, एक सामान्य सेडान कार में AC ऑन करने से फ्यूल कंजम्पशन 15% तक बढ़ जाता है।
कार निर्माताओं को अब यूजर मैनुअल और प्रमोशनल मटेरियल में AC ऑन और ऑफ दोनों स्थितियों के माइलेज आंकड़े अनिवार्य रूप से बताने होंगे। इससे Maruti Suzuki, Hyundai, Tata Motors जैसी कंपनियां प्रभावित होंगी, जो पहले से BS6 Phase 2 नॉर्म्स का पालन कर रही हैं। EV सेगमेंट में, जैसे Mahindra XUV400 या Tata Nexon EV, रेंज टेस्टिंग में AC का फैक्टर शामिल होगा, जो बैटरी परफॉर्मेंस को रियलिस्टिक बनाएगा।
नए नियम के मुख्य प्रभाव:
उपभोक्ता लाभ: खरीदार अब रियल-वर्ल्ड माइलेज पर फैसला ले सकेंगे, जिससे फ्यूल खर्च का बेहतर अनुमान लगेगा। उदाहरणस्वरूप, शहर में ड्राइविंग के दौरान AC यूज से माइलेज 12-18 kmpl से घटकर 10-15 kmpl रह सकता है।
निर्माताओं पर असर: कंपनियों को टेस्टिंग प्रोसेस अपग्रेड करने होंगे, जिससे लागत बढ़ेगी लेकिन ब्रैंड ट्रस्ट मजबूत होगा। SIAM (Society of Indian Automobile Manufacturers) ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन इंप्लीमेंटेशन के लिए समय मांगा है।
पर्यावरणीय फायदा: सटीक माइलेज क्लेम्स से कम फ्यूल कंजम्पशन को बढ़ावा मिलेगा, जो भारत के कार्बन एमिशन टारगेट्स (2030 तक 45% रिडक्शन) से जुड़ा है।
| वर्तमान टेस्टिंग | नई टेस्टिंग (अक्टूबर 2026 से) |
|---|---|
| AC ऑफ रखकर माइलेज जांच | AC ऑन रखकर जांच, रियल-वर्ल्ड सिमुलेशन |
| ICE वाहनों पर फोकस, EV में सीमित | सभी कारों (ICE और EV) पर लागू |
| उपभोक्ता शिकायतें ज्यादा | पारदर्शिता बढ़ेगी, क्लेम्स रियलिस्टिक |
यह बदलाव भारत की ऑटो इंडस्ट्री को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से जोड़ेगा, जहां यूरोप में WLTP पहले से AC फैक्टर शामिल करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे EV एडॉप्शन बढ़ेगा, क्योंकि रेंज एंग्जाइटी कम होगी।
Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।