“पीएम किसान सम्मान निधि योजना में बजट 2026 से पहले 22वीं किस्त जारी होने की संभावना, वर्तमान में 2000 रुपये प्रति किस्त लेकिन मांग है कि इसे 4000 रुपये तक बढ़ाया जाए; बिहार जैसे राज्यों में फार्मर आईडी की अनिवार्यता से लाखों किसान प्रभावित हो सकते हैं, जबकि कुल लाभार्थी 12 करोड़ से अधिक; कृषि बजट में 1.5 लाख करोड़ तक की वृद्धि की उम्मीद, लेकिन यदि वृद्धि नहीं हुई तो किसानों को महंगाई के बीच झटका लग सकता है।”
पीएम किसान योजना: बजट 2026 में क्या होगा किसानों का हाल?
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत वर्तमान में छोटे और सीमांत किसानों को सालाना 6000 रुपये मिलते हैं, जो तीन किस्तों में 2000-2000 रुपये के रूप में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होते हैं। योजना की शुरुआत 2019 में हुई थी और अब तक 21 किस्तें जारी हो चुकी हैं, जिनमें नवंबर 2025 में अंतिम किस्त शामिल है। कुल 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि 12 करोड़ से ज्यादा किसानों तक पहुंच चुकी है। लेकिन बजट 2026 के साथ 22वीं किस्त की उम्मीद है, जहां सरकार द्वारा राशि बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है।
यदि बजट में राशि बढ़ाकर 12000 रुपये सालाना कर दी जाती है, तो प्रति किस्त 4000 रुपये मिल सकते हैं, जो किसानों के लिए बड़ा तोहफा साबित होगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बढ़ती महंगाई, बीज-खाद की कीमतों और ईंधन खर्च को देखते हुए यह वृद्धि जरूरी है। संसदीय समिति ने भी 12000 रुपये तक बढ़ाने की सिफारिश की है, लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो 2000 रुपये प्रति किस्त ही जारी रहेगी, जो मौजूदा आर्थिक दबाव में किसानों के लिए झटका हो सकता है।
कृषि क्षेत्र में बजट आवंटन पिछले साल 1.37 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026 में 1.5 लाख करोड़ तक बढ़ने की उम्मीद है। इसमें पीएम किसान के लिए अतिरिक्त फंड शामिल हो सकता है, साथ ही फसल बीमा, सिंचाई और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन पर फोकस। लेकिन यदि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण फिस्कल डेफिसिट को कंट्रोल करने के लिए कटौती हुई, तो योजना प्रभावित हो सकती है।
पीएम किसान योजना की मुख्य विशेषताएं और पात्रता
लाभार्थी : छोटे और सीमांत किसान जिनके पास 2 हेक्टेयर तक जमीन है।
भुगतान प्रक्रिया : डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से आधार लिंक्ड बैंक खाते में।
ई-केवाईसी अनिवार्य : बिना ई-केवाईसी के किस्त रुक सकती है; बिहार में फार्मर आईडी की नई शर्त से 50 लाख से अधिक किसान प्रभावित हो सकते हैं।
बहिष्कार : संस्थागत किसान, इनकम टैक्स पेयर या सरकारी कर्मचारी पात्र नहीं।
राज्यवार प्रभाव : पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अधिक लाभार्थी, जहां महंगाई से किसान सबसे ज्यादा प्रभावित।
पिछली किस्तों का विवरण (तालिका)
| किस्त संख्या | जारी होने की तारीख (अनुमानित) | राशि प्रति किस्त (रुपये) | कुल लाभार्थी (करोड़ में) | कुल वितरित राशि (लाख करोड़ में) |
|---|---|---|---|---|
| 1 से 10 | 2019-2022 | 2000 | 10-11 | 1.5 |
| 11 से 15 | 2022-2023 | 2000 | 11.5 | 1.2 |
| 16 से 18 | 2024 | 2000 | 12 | 0.8 |
| 19 से 21 | 2025 | 2000 | 12.2 | 0.59 |
| 22 (संभावित) | फरवरी 2026 | 2000 या 4000? | 12.5 | अनुमानित 0.25-0.5 |
यह तालिका दर्शाती है कि योजना में लगातार विस्तार हुआ है, लेकिन राशि स्थिर रही। यदि बजट में वृद्धि हुई, तो 22वीं किस्त से नई दर लागू हो सकती है।
बजट 2026 में संभावित बदलाव और प्रभाव
बजट में यदि पीएम किसान की राशि 12000 रुपये हो जाती है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बूस्ट आएगा। अनुमान है कि इससे किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जो बाजार में मांग पैदा करेगी। लेकिन यदि नहीं बढ़ी, तो बढ़ते इनपुट कॉस्ट (जैसे यूरिया की कीमत 300 रुपये प्रति बैग से ऊपर) से किसान कर्ज में फंस सकते हैं।
सकारात्मक पक्ष : बढ़ी राशि से फसल उत्पादकता में निवेश संभव, जैसे बेहतर बीज और मशीनरी।
नकारात्मक पक्ष : यदि फिस्कल कंसोलिडेशन के कारण कटौती हुई, तो एमएसपी हाइक या फर्टिलाइजर सब्सिडी प्रभावित हो सकती है, जो 1.8 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है।
राज्यवार चुनौतियां : बिहार में फार्मर आईडी की वजह से बहिष्कार, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में ई-केवाईसी की कमी से देरी।
वैकल्पिक समर्थन : बजट में एग्री क्रेडिट टारगेट 20 प्रतिशत बढ़ाकर 22 लाख करोड़ तक हो सकता है, जो किसानों को लोन में आसानी देगा।
कैसे चेक करें खाते में कितनी राशि आएगी?
किसान पीएम किसान पोर्टल पर जाकर स्टेटस चेक कर सकते हैं। स्टेप्स:
pmkisan.gov.in पर जाएं।
‘Beneficiary Status’ पर क्लिक करें।
आधार, अकाउंट या मोबाइल नंबर एंटर करें।
यदि ई-केवाईसी पेंडिंग है, तो नजदीकी CSC सेंटर पर पूरा करें।
यदि राशि बढ़ी, तो नोटिफिकेशन SMS से आएगा।
यदि बजट में कोई ऐलान नहीं हुआ, तो 2000 रुपये ही मिलेंगे, लेकिन मांग है कि इसे 4000 तक किया जाए। किसानों को सलाह है कि दस्तावेज अपडेट रखें, ताकि किस्त न रुके।
अन्य कृषि योजनाओं से जुड़ाव
पीएम किसान को अन्य स्कीम्स जैसे पीएम फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ा जा सकता है। बजट में यदि इंटीग्रेशन बढ़ा, तो किसानों को एकीकृत लाभ मिलेगा। उदाहरण के लिए, यदि राशि बढ़ी, तो बीमा प्रीमियम में उपयोग संभव। लेकिन यदि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ, तो घरेलू समर्थन और मजबूत होगा।
संभावित जोखिम और सुझाव
जोखिम : यदि बजट में कटौती हुई, तो ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ सकती है, क्योंकि एमजीएनआरईजीए जैसी स्कीम्स पर भी दबाव।
सुझाव : किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे e-NAM का उपयोग करें, जहां मंडी कनेक्शन से बेहतर दाम मिल सकते हैं।
आर्थिक प्रभाव : यदि राशि दोगुनी हुई, तो जीडीपी में 0.5 प्रतिशत तक का योगदान संभव, खासकर ग्रामीण कंजम्प्शन से।
भविष्य की दिशा : बजट में एआई इन फार्मिंग पर फोकस से प्रोडक्टिविटी बढ़ सकती है, जो लंबे समय में पीएम किसान की जरूरत कम करेगी।
यह सब बजट के ऐलान पर निर्भर करेगा, जहां किसानों की उम्मीदें ऊंची हैं लेकिन वास्तविकता फिस्कल बैलेंस पर टिकी है।
Disclaimer: यह लेख सूचना प्रदान करने के उद्देश्य से है और किसी भी निवेश या योजना संबंधी निर्णय के लिए पेशेवर सलाह नहीं माना जाना चाहिए। सभी डेटा उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं।