एलआईसी म्यूचुअल फंड के एमडी आरके झा ने सोने-चांदी के मौजूदा हालात पर खुलासा किया है। 2025 में रिकॉर्ड तेजी के बाद 2026 में करेक्शन की आशंका है, इसलिए लंपसम से बचें और गोल्ड-सिल्वर ETF में SIP शुरू करें। चांदी में इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत, सोना पोर्टफोलियो हेज के लिए बेहतर।
सोना-चांदी में पैसा लगाएं या रुकें? LIC MF के MD ने 7 सवालों में सब समझा दिया
एलआईसी म्यूचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर आरके झा ने हालिया इंटरव्यू में निवेशकों के प्रमुख सवालों का जवाब दिया है। 2025 में सोना और चांदी ने जबरदस्त रिटर्न दिए—सोना करीब 76% और चांदी 170% तक चढ़ी—लेकिन 2026 की शुरुआत में कीमतों में सुधार देखा जा रहा है। फरवरी 2026 में MCX पर सोना 1,57,800-1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि चांदी 2.59-2.60 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर है।
झा ने साफ कहा कि कीमतें अब पीक के करीब हैं, इसलिए टाइमिंग सही चुनना जरूरी है। उन्होंने 7 मुख्य सवालों के जरिए निवेश की पूरी रणनीति समझाई:
अभी सोना-चांदी में निवेश करना चाहिए या इंतजार करना बेहतर? अभी पूरी तरह रुकना नहीं चाहिए, लेकिन एकमुश्त (लंपसम) निवेश से बचें। 2025 की तेज रैली के बाद करेक्शन आ सकता है। इसलिए स्टैगर्ड तरीके से एंट्री लें। गोल्ड और सिल्वर दोनों में लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में वोलेटिलिटी ज्यादा रहेगी।
गोल्ड ETF vs सिल्वर ETF: किसमें ज्यादा अलोकेशन दें? सोना मुख्य रूप से सेफ हेवन और पोर्टफोलियो प्रोटेक्शन के लिए बेहतर है। चांदी में इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिफिकेशन) मजबूत है, इसलिए ग्रोथ पोटेंशियल ज्यादा। बैलेंस्ड पोर्टफोलियो में 60-70% गोल्ड और 30-40% सिल्वर रखें। LIC MF के गोल्ड ETF FOF जैसे प्रोडक्ट ट्रैकिंग एरर कम रखते हैं।
SIP या लंपसम: सोने-चांदी में कौन सा तरीका अपनाएं? SIP सबसे सुरक्षित और प्रभावी है। बाजार के उतार-चढ़ाव में एवरेज कॉस्ट कम होता है। झा ने सलाह दी कि मासिक SIP से शुरू करें, खासकर तब जब कीमतें सपोर्ट लेवल पर हों। लंपसम तभी करें जब बड़ा करेक्शन आए। 2026 में SIP से एंट्री करने वाले निवेशकों को फायदा मिल सकता है।
2026 में सोना-चांदी के रिटर्न की क्या उम्मीद? मीडियम-टर्म में पॉजिटिव आउटलुक है। ग्लोबल अनिश्चितता, इन्फ्लेशन और जियोपॉलिटिकल टेंशन सोने को सपोर्ट करेंगे। चांदी में सप्लाई कंस्ट्रेंट और इंडस्ट्रियल यूज से डेफिसिट बना रहेगा। लेकिन 2025 जैसी 100%+ रैली की उम्मीद कम है—रियलिस्टिक 15-25% एनुअल रिटर्न संभव।
पोर्टफोलियो में सोना-चांदी का कितना प्रतिशत होना चाहिए? कुल पोर्टफोलियो का 10-15% प्रेशियस मेटल्स में रखें। ज्यादा अलोकेशन से रिस्क बढ़ सकता है। इक्विटी और डेट के साथ बैलेंस रखें। LIC MF जैसे फंड्स में गोल्ड ETF FOF हाई रिस्क से हाई में डाउनग्रेड हुआ है, जो रियलिस्टिक रिस्क दिखाता है।
फिजिकल गोल्ड/चांदी vs ETF/MF: क्या चुनें? ETF और फंड ऑफ फंड बेहतर हैं—मेकिंग चार्जेस, स्टोरेज और सिक्योरिटी की टेंशन नहीं। ट्रेडिंग आसान, लिक्विडिटी हाई। LIC MF Gold ETF जैसे ऑप्शन ट्रैकिंग एरर 2% से कम रखते हैं। फिजिकल में TDS और GST भी लगता है।
क्या कोई स्पेशल टिप निवेशकों के लिए? डिसिप्लिन बनाए रखें। SIP जारी रखें, रेगुलर रिव्यू करें। ग्लोबल सिग्नल्स (US रेट कट्स, डॉलर मूवमेंट) पर नजर रखें। लॉन्ग-टर्म (5+ साल) होराइजन वाले निवेशकों के लिए अभी भी अच्छा समय है, लेकिन ग्रिड से बाहर न जाएं।
तालिका: सोना-चांदी के प्रमुख ETF ऑप्शन (LIC MF फोकस)
LIC MF Gold ETF: AUM करीब 1,100 करोड़, एक्सपेंस रेशियो 0.41%, हाई रिस्क, डोमेस्टिक गोल्ड प्राइस ट्रैक करता है।
LIC MF Gold ETF FoF: SIP न्यूनतम 200 रुपये, लंपसम 5,000 रुपये, ट्रैकिंग एरर कम, 3-स्टार रेटिंग वाले फंड्स में शुमार।
सिल्वर ETF: इंडस्ट्रियल डिमांड से मजबूत, लेकिन वोलेटिलिटी ज्यादा।
निवेश से पहले अपनी रिस्क प्रोफाइल और फाइनेंशियल गोल चेक करें। मार्केट कंडीशंस बदलते रहते हैं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी और एक्सपर्ट ओपिनियन पर आधारित है। निवेश से पहले प्रमाणित एडवाइजर से सलाह लें। बाजार जोखिम के अधीन है।