**” अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ रद्द होने के बाद भारत के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। अब भारतीय उत्पाद अमेरिका में सस्ते होंगे, खासकर टेक्सटाइल, गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और कुछ मशीनरी सेक्टर में बूम आने की संभावना है। स्टील और एल्युमिनियम पर सेक्शन 232 टैरिफ बने रहने से इनमें सीमित फायदा, लेकिन कुल मिलाकर 55% से ज्यादा निर्यात पर ड्यूटी घटकर 10% रह गई है, जो पहले 18-50% तक थी। इससे निर्यात बढ़ेगा और कई प्रोडक्ट्स अमेरिकी बाजार में सस्ते पड़ेंगे। “**
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रंप प्रशासन के व्यापक रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया, जिससे IEEPA के तहत लगाए गए अतिरिक्त ड्यूटी रद्द हो गए। इससे पहले भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% तक पहुंच गया था, जो रूसी तेल खरीद के कारण 50% तक हो गया था। फरवरी 2026 में भारत-अमेरिका इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट के तहत इसे 18% तक कम किया गया था, लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने सेक्शन 122 के तहत नया 10% ग्लोबल टैरिफ लगा दिया, जो 24 फरवरी 2026 से प्रभावी है और 150 दिनों तक चलेगा।
ट्रेड डील वाले देशों जैसे भारत पर यह 10% लागू हो रहा है, जो 18% से कम है। इससे भारतीय निर्यातकों को तत्काल राहत मिली है, क्योंकि पहले की तुलना में ड्यूटी में भारी कमी आई है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है, जहां कुल निर्यात का करीब 21% जाता है।
मुख्य सेक्टर जहां बड़ा फायदा होगा
टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर सबसे ज्यादा लाभान्वित होगा। भारतीय कपड़े, गारमेंट्स और होम टेक्सटाइल अब अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी होंगे। लेबर-इंटेंसिव सेक्टर होने से MSME को ऑर्डर बढ़ने की उम्मीद है। गारमेंट्स एक्सपोर्ट में 15-20% ग्रोथ का अनुमान है।
स्टील और एल्युमिनियम पर सेक्शन 232 टैरिफ 50% बने रहने से इनका डायरेक्ट फायदा सीमित रहेगा। भारत से अमेरिका को स्टील-एल्युमिनियम एक्सपोर्ट पहले ही कम था (करीब 95,000 टन स्टील और 0.2 मिलियन मीट्रिक टन एल्युमिनियम FY24 में), लेकिन कुछ स्पेशलाइज्ड प्रोडक्ट्स जैसे एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ हटने से एयरोस्पेस से जुड़े निर्यात बढ़ सकते हैं।
क्या-क्या प्रोडक्ट्स अमेरिका में सस्ते होंगे? पूरी लिस्ट
नीचे प्रमुख कैटेगरी और अनुमानित प्रभाव वाली लिस्ट दी गई है:
टेक्सटाइल और अपैरल : कपड़े, रेडीमेड गारमेंट्स, होम फर्निशिंग (बेडशीट, कर्टेंस) – ड्यूटी में कमी से 10-15% सस्ता पड़ सकता है। भारतीय ब्रांड्स जैसे Raymond, Arvind और कई MSME को फायदा।
लेदर और फुटवियर : जूते, बैग, लेदर प्रोडक्ट्स – पहले 25%+ टैरिफ से प्रभावित, अब कम ड्यूटी से एक्सपोर्ट बूम।
जेम्स एंड ज्वेलरी : हीरे, सोने के आभूषण, प्रेशियस स्टोन्स – बड़े बाजार में 30%+ शेयर वाले सेक्टर में कीमतें घटेंगी।
प्लास्टिक और रबर प्रोडक्ट्स : इंडस्ट्रियल पार्ट्स, होम डेकोर – प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
ऑर्गेनिक केमिकल्स और होम डेकोर : कुछ कैटेगरी में जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ की संभावना।
आर्टिसनल प्रोडक्ट्स और कुछ मशीनरी : हैंडिक्राफ्ट, छोटे मशीन पार्ट्स – सस्ते होने से डिमांड बढ़ेगी।
जेनरिक फार्मास्यूटिकल्स : कुछ में रेसिप्रोकल टैरिफ हटने की उम्मीद, लेकिन सेक्शन 232 जांच चल रही है।
एयरक्राफ्ट और पार्ट्स : सेक्शन 232 से एग्जेम्प्ट, बड़ा फायदा।
स्टील-टेक्सटाइल बूम की वजहें
टेक्सटाइल में भारत पहले से मजबूत है। ड्यूटी घटने से वियतनाम, बांग्लादेश जैसे कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले एज मिलेगा। स्टील में हालांकि 50% टैरिफ बरकरार है, लेकिन ग्लोबल सरप्लस से प्राइस प्रेशर कम हो सकता है। कुल निर्यात में 55% हिस्सा अब MFN रेट्स (औसत 2.5-3.5%) पर जाएगा, जो पहले 25-50% था।
अन्य प्रभाव
ऑटो पार्ट्स पर प्रेफरेंशियल क्वोटा मिलने से कुछ राहत। लेकिन सेक्शन 232 टैरिफ से स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर और ऑटो कंपोनेंट्स पर हाई ड्यूटी बनी रहेगी। भारत ने अमेरिकी इंडस्ट्रियल गुड्स और एग्री प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम करने का वादा किया है, जिससे बैलेंस ट्रेड बढ़ेगा।
यह बदलाव भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, खासकर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स में जहां रोजगार बढ़ेगा।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्ट्स और ट्रेड एनालिसिस पर आधारित है। टैरिफ में बदलाव तेजी से हो सकते हैं, इसलिए आधिकारिक अपडेट्स की जांच करें।